एक कहानी - पति की परिभाषा

सीमा,,,सीमा,,,,कहा हो तुम अरे बाबा जल्दी नीचे आओ।छत पर खड़ी सीमा के कानो में नवीन जी की आवाज़ पङी जो नीचे स्कूटर खङा करते करते आवाज़ लगा रहे थे ।वैसे तो नवीन जी कुछ दिनों से आफिस से देर रात आकर ज्यादातर चुप ही रहते थे ।पर आज उनकी आवाज़ मे अलग ही खुशी महसूस हो रही हैं ।सीमा भागकर नीचे आयी तो देखा की नवीन के हाथों में एक बङा सा थैला था।नवीन ने वो थैला सीमा को देते हुए कहा कि देखो मै तुम्हारे लिए क्या लाया हूँ सीमा ने थैला खोलकर देखा तो उसमें ठीक वैसी ही साङी है जो उसने मसूरी में देखीं थी जब वो नवीन के साथ हनीमून पर गयी थी और जिसे न ले पाने की कसक पूरे हनीमून पर उसके साथ थी।

आपकों ये कहाँ से मिलीं सीमा चौंक कर बोली???

वो मैंने कुछ दिनों पहले अपने आफिस के पास वाली मार्केट में देखीं थी वही से लाया हूँ।आज नवीन के चेहरे पर अलग ही खुशी थी शायद उसे शादी के बाद पहली बार पत्नी को उसकी पसंद की साङी न दिला पाने का बोझ उतर गया था।

पर,, यह तो बहुत महंगी थी आपने ही कहा था।नवीन सीमा की ओर देख कर बोला अरे नहीं ये तो उससे बहुत कम दाम में मिली है और बिल्कुल वही साङी है वो तो हिल स्टेशन पर चीजे मिलती ही चार गुना दाम मे है।

शायद नवीन सही कह रहे हैं।सीमा मन में सोचते हुए बोली बिल्कुल वैसी ही तो है मसूरी में तो पूरे पाँच हज़ार की थी सीमा को साङी का मूल्य अभी तक याद था क्योकि उसे एक नजर में पसंद जो आयी थी।खुश होते हुए बोली आपकों अभी तक याद थी ये साङी।

और नहीं तो क्या ऐसे कैसे भूल सकता हूँ।नवीन की आवाज़ थोडी तेज हो गई थी।ये साङी तो मैं उसी दिन ले सकता था पर मैं जानता था कि पाँच हज़ार रूपये इस साङी के लिए बहुत ज्यादा थे।


सीमा मन में सोच रही थी कि बेकार में वो नवीन को कंजूस समझ रही थी।पर आप तो कह रहे थे कि आफिस से शादी में जो कर्ज लिया था वो भी वापस करना पङ रहा है।इसलिए घर में तनख़्वाह के पैसे थोङे कम आयेंगे फिर ये साङी कहाँ से???

सीमा कुछ बोलतीं इससे पहले नवीन उसे सोफे पर बिठाते हुए कहा।हां आफिस से तनख़्वाह कम आ रही हैं पर मैं आफिस से आते हुए एक दुकान का एकाउंट का काम देखते हुए आता था ये मैं उसी से मिलें पैसों से लाया हूँ।

अब सीमा को याद आया नवीन का वो देर रात घर आना और चुपचाप रहना।शायद वो दिन भर की थकान थी जिसे वह बेरूखी समझ रही थी।

तभी नवीन ने कहा सालगिरह मुबारक हो।

सीमा चौंकी अभी उसकी शादी को कुछ ही महीने हुए थे और न तो आज उसका जन्मदिन था न ही नवीन का फिर ये सालगिरह की बधाई?

नवीन सीमा का चेहरा देख कर मुसकुराते हुए बोला।

अरे मेरी भोली बीवी शादी के पहले जब हम पहली बार मिले थे आज उस दिन को पूरा एक साल हो गया है।कैसे भूल सकता हूँ उस दिन को।

सीमा उठ कर नवीन के गले लगकर रोने लगी।

अरे,,,ये खुशी के मौके पर रोना क्यू नवीन सीमा का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए बोला।

पर सीमा जानतीं थीं कि उसकी आँखों में ये ऑंसू क्यू है वो कब से नवीन को एक कंजूस और अकङू पति समझ रही थी जो शादी के बाद अचानक बदल गयें थे।पर अब वो समझ चुकी थी नवीन को और उसके प्यार को,,,,,

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